कुम्हारी। महामाया रोड वार्ड क्रमांक 3 स्थित छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से कुम्हारी में तैयार किए गए कृष्ण कुंज की स्थिति वर्तमान में देख-रेख के अभाव में बेहद चिंताजनक बनी हुई है। विभाग द्वारा लाखों की लागत और दावों के साथ यहाँ विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपे गए थे, लेकिन वर्तमान में धरातल पर पानी और उचित संरक्षण की भारी कमी देखी जा रही है। इसके चलते कई पेड़ पूरी तरह से सूख चुके हैं और कई सूखने की कगार पर हैं।
परिसर में लगे शासकीय बोर्ड के अनुसार, सामान्य वन मण्डल दुर्ग (वनपरिक्षेत्र – धमधा) के अंतर्गत इस 0.40 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्ष 2022-23 के दौरान कदम, बदाम, आम, जामुन, बरगद और पीपल जैसी कुल 24 से अधिक प्रजातियों के 268 पौधे रोपे गए थे। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखें, तो यहाँ नियमित सिंचाई की कोई सुदृढ़ व्यवस्था नहीं है। पूरा मैदान सूखा पड़ा है और पानी के अभाव में कई पौधे केवल सूखी लकड़ियों के ढांचे में तब्दील हो चुके हैं।
वर्तमान में देश और प्रदेश में एक पेड़ माँ के नाम अभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। पर्यावरण संवर्धन के लिए नए पौधे लगाना बेहद जरूरी और सराहनीय कदम है, लेकिन इसके साथ ही विभाग की इस लापरवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जागरूक नागरिकों का कहना है कि नए पौधे लगाने के उत्साह में पहले से रोपे गए और बड़े हो रहे पुराने पेड़ों को इस तरह भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। नए पौधे कभी भी उन पुराने और स्थापित हो चुके पेड़ों की भरपाई तुरंत नहीं कर सकते, जिन्हें जीवित रखने में पूर्व में शासकीय राशि और समय लगाया जा चुका है।
यदि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने कुम्हारी के इस कृष्ण कुंज में पानी की आपूर्ति और नियमित देख-रेख की व्यवस्था तत्काल दुरुस्त नहीं की, तो बचे हुए अन्य वृक्ष भी जल्द ही दम तोड़ सकती हैं। आवश्यक है कि नए वृक्षारोपण के साथ-साथ इन पुराने पौधों को सहेजने पर विशेष ध्यान दिया जाए।
