जनप्रतिनिधियों की हो रही अनदेखी
कुम्हारी। नगरपालिका परिषद कुम्हारी में शुक्रवार को आयोजित “प्रेसिडेंट इन काउंसिल” (PIC) की बैठक में सदस्यों की अनुपस्थिति को लेकर मचे घमासान के बीच अब राजनीति गरमा गई है। बैठक से नदारद रहे पीआईसी सदस्य और पार्षद डिकेश पटेल ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। उन्होंने नगरपालिका के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सीधे तौर पर अफसरशाही और तानाशाही हावी होने की बात कही है।
डिकेश पटेल का आरोप है कि नगरपालिका परिषद कुम्हारी द्वारा पीआईसी सदस्यों को बैठक की सूचना तो दे दी जाती है, लेकिन किसी भी सदस्य को बैठक के एजेंडा की कॉपी पहले उपलब्ध नहीं कराई जाती। जब सदस्य एजेंडे की कॉपी मांगते हैं, तो उन्हें ऐन बैठक के दिन तत्काल उसी समय कॉपी थमाई जाती है, जिससे प्रस्तावों को समझने का मौका नहीं मिलता।
जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते हुए पार्षद ने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए 1 करोड़ 21 लाख 50 हजार रुपए की पाइपलाइन विस्तारीकरण का टेंडर निकाला गया था। इसके बावजूद पालिका प्रशासन और अधिकारियों द्वारा अब तक इसका वर्क ऑर्डर जारी नहीं किया गया, जबकि गर्मी का सीजन अब समाप्ति की ओर है।
अधिकारियों की इसी मनमानी के चलते पहले भी इस टेंडर को निरस्त करवा दिया गया था, जिसके कारण आम जनता को पानी की भारी किल्लत और दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों को जनता की कोई फिक्र नहीं है। पीआईसी की बैठक में सिर्फ कागजी प्रस्ताव पास होते हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं दिखता। जनप्रतिनिधियों की बातों को पूरी तरह अनसुना किया जा रहा है।
डिकेश पटेल ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे नियमों का हवाला देकर एजेंडे के कामों में रोड़ा अटकाते हैं। उन्होंने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक्शन लेता है या सवाल उठाता है, तो अधिकारी सारे कर्मचारियों को जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ही धरने पर बैठा देते हैं। चूंकि कोई भी विकास कार्य अधिकारियों के हस्ताक्षर के बिना संभव नहीं है, इसलिए वे विपक्षियों के साथ मिलकर मनमानी कर रहे हैं, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर नगर के विकास और जनप्रतिनिधियों को भुगतना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला
नगरपालिका कुम्हारी में शुक्रवार को एक गंभीर मामला सामने आया। शहर के विकास, साफ-सफाई और करोड़ों रुपये के प्रस्तावों पर मुहर लगाने के लिए बुलाई गई प्रेसिडेंट इन काउंसिल की बेहद अहम बैठक से सारे सदस्य गायब रहे। वजह पार्षदों और पीआईसी सदस्यों की सामूहिक उदासीनता या नाराजगी? कुछ भी स्पष्ट नहीं है। इस बैठक में जनता की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए केवल नगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ही अपनी कुर्सियों पर मुस्तैद दिखे। इतने अहम बैठक में सदस्यों की सामूहिक अनुपस्थिति कहीं न कहीं एक सवाल पैदा करती है। इस बात को लेकर जहां विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर नजर आया वहीं आम जनता की समस्याओं के साथ भी यह सही नहीं है।
आगामी मानसून को देखते हुए शहर में जलभराव की समस्या, वार्डों की साफ-सफाई और बुनियादी विकास कार्यों को लेकर इस बैठक में कई बड़े फैसले होने थे। लेकिन पीआईसी सदस्यों के इस रवैये के कारण पूरी बैठक ठप हो गई। सवाल यह उठ रहा है कि क्या चुनकर आए जनप्रतिनिधियों के लिए शहर का विकास और जनता की परेशानियां कोई मायने नहीं रखतीं?
इस गैर-जिम्मेदाराना रवैये पर कड़ा रुख अपनाते हुए नगरपालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने संयुक्त बयान में कहा, यह अनुपस्थिति सिर्फ एक बैठक का छूटना नहीं है, बल्कि स्थानीय जनता के साथ असंवेदनशील रवैया भी है। जब शहर को विकास कार्यों की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब सदस्यों का इस तरह गायब रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन जनता के काम रोकना भी सही नहीं है।
इस घटना के बाद शहर के सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर क्यों सदस्यों ने बैठक से दूरी बना ली।
श्रीमती मीना वर्मा, अध्यक्ष, नगरपालिका परिषद कुम्हारी ने कहा कि इस अहम बैठक में सदस्य क्यों उपस्थित नहीं हुए इसकी कोई जानकारी मुझे नहीं है। हमने यथासमय बैठक आयोजित की थी अगर कोई शिकायत होती तो चर्चा कर समाधान निकाला जा सकता था। अब आगामी बैठक में इसपर बात होगी। फिलहाल सदस्यों की अनुपस्थिति का कोई कारण मुझे ज्ञात नहीं है।
प्रमोद सिंह राजपूत, उपाध्यक्ष, नगरपालिका परिषद कुम्हारी ने कहा कि पी आई सी की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण थी। आगामी बारिश को देखते हुए नगर के लिए कई अहम फैसले होने थे साथ ही विकास कार्यों की स्वीकृति भी होनी थी ऐसे अहम बैठक में सदस्यों की अनुपस्थिति यह साबित करती है कि वे कितने गैर जिम्मेदार हैं इन्हें नगर में विकास के कार्यों से कोई लेना देना नहीं है। आपके आपसी मतभेद और दिक्कतें आपकी अपनी व्यक्तिगत हैं इससे आम जनता का क्या लेना देना। जो भी हुआ वह दुर्भाग्यजनक है ऐसा नहीं होना था।
