कुम्हारी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कुम्हारी की अव्यवस्थाओं को लेकर प्रकाशित खबर के महज 24 घंटों के भीतर जनता का भारी आक्रोश देखने को मिला है। सोशल मीडिया पर इस खबर के वायरल होने के बाद लोगों ने कमेंट के माध्यम से अस्पताल की बदहाली और अपने साथ हुए कड़वे अनुभवों को साझा किया है।
अस्पताल की कार्यप्रणाली से नाराज यूजर्स ने अपनी शिकायतों की झड़ी लगा दी है। एक यूजर ने लिखा कि यहाँ रात में कोई जिम्मेदार डॉक्टर नहीं मिलता, सिर्फ पढ़ाई करने वाले नर्सिंग स्टूडेंट्स के भरोसे अस्पताल छोड़ दिया जाता है।
एक अन्य यूजर ने दावा किया कि उनकी बहन की तबीयत खराब होने पर उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया गया कि डॉक्टर सुबह आएंगे।
कई लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में दवाइयां उपलब्ध नहीं रहतीं। एक यूजर के अनुसार, अस्पताल में सिर्फ पैरासिटामोल मिलती है, बाकी सभी दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। यहाँ तक कि सांप काटने जैसे इमरजेंसी केस में भी डॉक्टर उपलब्ध न होने की बात कही गई है।
यूजर्स ने बताया कि अस्पताल का स्टाफ मरीजों और उनके परिजनों से संवेदनहीन तरीके से बात करता है। एक यूजर ने लिखा, यहाँ के स्टाफ को बात करने की तमीज तक नहीं है, पूछने पर सीधे गुस्से में जवाब देते हैं।
एक कमेंट के अनुसार, अस्पताल के बिस्तर इतने गंदे हैं कि स्वस्थ इंसान भी बीमार पड़ जाए। कुछ यूजर्स ने तो इसे जानवरों का अस्पताल तक कह डाला और यहाँ के सिस्टम को पूरी तरह घटिया बताया।
लोगों का कहना है कि यह समस्या केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि सालों से कुम्हारी CHC का यही हाल है। स्वास्थ जैसे बुनियादी मुद्दों पर कुम्हारी का पिछड़ना स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। सोशल मीडिया पर लोग अब मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्हारी में इतनी बदहाली और जनता के भारी विरोध के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा राजनीतिक दल, सामाजिक संस्थान, संगठन या NGO इस गंभीर परेशानी को खत्म करने के लिए आगे आता है। क्या कोई इस अव्यवस्था के खिलाफ मजबूती से खड़ा होगा, या कुम्हारी की जनता इसी तरह बुनियादी इलाज के लिए तरसती रहेगी?
