कुम्हारी नगर पालिका में विकास ठप, अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा

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विकास की जगह ‘विनाश’ और जवाबदेही का अभाव: ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का तीखा प्रहार

कुम्हारी। वर्तमान नगरपालिका की कार्यप्रणाली एवं अव्यवस्था को लेकर ब्लॉक कॉग्रेस कमेटी कुम्हारी ने विरोध में मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के माध्यम से वर्तमान नगरपालिका प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मनहरण यादव ने कहा कि आज सत्ता पक्ष की नाकामी की वजह से आज हमें यह प्रेस वार्ता करना पड़ रहा है अगर सब कुछ ठीक होता और विकास कार्य सुचारू रूप से चल रहे होते, तो आज इसकी जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि जनता ने इस विश्वास के साथ वोट दिया था कि केंद्र और राज्य में तो उनकी सरकार है ही, नगर पालिका में भी ‘तीसरा इंजन’ आने से विकास की गति और तेज होगी।

जनता ने बड़े भरोसे के साथ यह ‘ट्रिपल इंजन’ की सरकार चुनी थी, लेकिन बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि पिछले डेढ़ साल के कार्यकाल में विकास के बजाय केवल ‘विनाश’ देखने को मिल रहा है। कुम्हारी नगर पालिका की वर्तमान सत्ता हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है।


नगर की मूलभूत सुविधाएं जैसे रोड, नाली, साफ-सफाई और बिजली की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जब हम इस विषय में अध्यक्ष महोदय से बात करते हैं, तो वे कहते हैं कि ‘मैं तो अभी नया-नया बनी हूँ, सीख रही हूँ।’ जब मुख्य नगर पालिका अधिकारी से पूछा जाता है, तो वे गोल-मोल जवाब देते हैं कि ‘मुझे अभी जानकारी नहीं है, पता करके बताता हूँ।’ तो आखिर इस नगर की जिम्मेदारी किसकी है? नगर के विकास की जिम्मेदारी अध्यक्ष और सीएमओ की होती है, लेकिन यहाँ जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है।

वर्तमान सत्ता पक्ष अपनी हर विफलता का ठीकरा पिछले कार्यकाल पर फोड़ देता है। जब भी किसी समस्या पर सवाल करो, तो वे कहने लगते हैं कि पिछले सालों में ऐसा हुआ या वैसा हुआ। हम कहते हैं कि ठीक है, अगर पहले कुछ नहीं हुआ, तो आप सत्ता में आए हैं तो अब अच्छा करके दिखाइए। आप फंड की व्यवस्था कीजिए, नई योजनाएं लाइए, लेकिन इनके पास न तो कोई विजन है और न ही काम करने की इच्छाशक्ति।


आज नगर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए और मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रही है, और प्रशासन केवल बहानेबाजी में लगा हुआ है।”

“प्रदेश में स्कूल और भर्ती प्रक्रियाएँ पूरी तरह से बंद या बाधित कर दी गई हैं। स्कूलों को बंद करवाया जा रहा है और संविदा भर्तियों में अनियमितताएं हो रही हैं। जो युवा पढ़-लिखकर बेरोजगार घूम रहे हैं, उनके साथ अन्याय हो रहा है। पंचायत स्तर से लेकर उच्च स्तर तक शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने की स्थिति पैदा हो गई है। आत्मानंद स्कूलों की स्थिति भी खराब है, जहाँ कभी मुफ्त शिक्षा की बात होती थी, अब वहां शुल्क लिया जा रहा है।”


“यह सरकार केवल प्रचार-प्रसार की सरकार बनकर रह गई है। जगह-जगह बड़े-बड़े होर्डिंग और फोटो लगाकर झूठा प्रचार किया जा रहा है कि हमने ये किया, वो किया। धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। भ्रष्टाचार चरम पर है और केंद्र व राज्य में अपनी सरकार होने का रौब दिखाया जा रहा है, जबकि जनता का विश्वास इन्होंने खो दिया है।”

“कुम्हारी नगर पालिका में इस बार ऐसे-ऐसे लोग पीआईसी के सदस्य बन गए हैं, जिन्हें न तो एजेंडा पता है और न ही काम करने का तरीका। जो अनुभवी पार्षद हैं, उन्हें दरकिनार कर दिया गया है। जब भी परिषद में कोई सवाल पूछा जाता है, तो ये सदस्य एक-दूसरे का मुंह ताकते रह जाते हैं। अनुभवहीनता के कारण नगर का विकास पूरी तरह से रुक गया है।”


“नगर के प्रमुख तालाबों की स्थिति बहुत खराब है। इन तालाबों का निस्तारी कार्य और सफाई लंबे समय से अटकी हुई है। टेंडर होने के बाद भी काम शुरू नहीं हो रहा है। नगर की जनता निस्तारी के लिए परेशान है, लेकिन प्रशासन के पास कोई स्पष्ट योजना नहीं है।”

उन्होंने कहा कि यदि आप काम नहीं कर पा रहे हैं, तो विपक्ष के अनुभवी पार्षदों और कांग्रेस के साथियों से सलाह लेने में कोई बुराई नहीं है। राजनीति अपनी जगह है, लेकिन नगर का विकास पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि आप नहीं जानते, तो पूछिए, क्योंकि अंततः जनता ही इससे परेशान हो रही है।


अपनी बात रखते हुए पूर्व पालिकाध्यक्ष राजेश्वर सोनकर ने कहा कि आज कुम्हारी नगर पालिका और राज्य सरकार के गठन के लगभग डेढ़ साल बीत जाने के बाद जो स्थिति निर्मित हुई है, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे 10 साल तक पालिका में सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन आज जो हालात हैं, उसे देखकर बहुत तकलीफ होती है।


डबल और ट्रिपल इंजन की सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने यह सोचकर वोट दिया था कि ऊपर भाजपा की सरकार है, तो नगर पालिका में भी भाजपा के नुमाइंदे होने से विकास की गति तेज होगी। लेकिन आज स्थिति यह है कि विकास की गति बढ़ने के बजाय पूरी तरह ठप हो गई है। वर्तमान सत्ता पक्ष अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए केवल बहानेबाजी कर रहा है।


नगर में पानी की व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। वार्डों में मोटर पंप खराब हैं। मैंने खुद एक वार्ड की समस्या सुलझाने के लिए पर्यवेक्षक और अधिकारियों को फोन किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हद तो तब हो गई जब पार्षद द्वारा पाइप जुड़वाने के नाम पर 1700 रुपए नगद वसूले गए, जबकि यह काम पालिका का है। इसी से यह स्पष्ट होता है कि सीएमओ और अध्यक्ष का अपने अधिकारियों पर कोई कंट्रोल नहीं है।


पिछली सरकार में कुम्हारी को स्वच्छता में देश में प्रथम स्थान मिला था, लेकिन आज गाड़ियों की बैटरी चोरी हो रही है। सफाई कर्मचारियों को ड्रेस और जरूरी संसाधन नहीं मिल रहे हैं।
प्रधानमंत्री जी ‘एक पेड़ मां के नाम’ लगाने की बात करते हैं, लेकिन कुम्हारी के महामाया मंदिर परिसर में लगे पुराने और विशाल पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया। जब मैंने अध्यक्ष से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा कि ‘उन्हें जानकारी नहीं है।’ क्या एक अध्यक्ष की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वह अपने क्षेत्र में हो रहे ऐसे कार्यों का संज्ञान ले?


वर्तमान परिषद में अनुभव की भारी कमी दिखाई देती है नए पार्षदों को नियमों और अधिनियमों की जानकारी नहीं है और उन्हें गुमराह किया जा रहा है। हमने हमेशा जनता के हित में काम किया है, लेकिन वर्तमान सत्ता पक्ष केवल दिखावे और विज्ञापनों की राजनीति कर रहा है।”
राजेश्वर सोनकर ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नगर की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो विपक्ष जनता के साथ मिलकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होगा।


“नगर पालिका में डब्ल्यूबीएम सड़कों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। जहाँ सीसी रोड और सीमेंटेड सड़कों की जरूरत है, वहां फिर से डब्ल्यूबीएम रोड बनाई जा रही है। यह सीधे तौर पर ठेकेदारों को फायदा पहुँचाने और सरकारी पैसे की बर्बादी का मामला है। उपाध्यक्ष महोदय ने भी इस पर सवाल उठाए, लेकिन प्रशासन मौन है।”


बैठकों में जब किसी कार्य या बजट की जानकारी मांगी जाती है, तो अधिकारी कहते हैं कि ‘हमें जानकारी नहीं है, पता करके बताएंगे।’ एक जिम्मेदार अधिकारी का यह कहना कि उसे जानकारी नहीं है, बेहद शर्मनाक है।

“पालिका में ‘परिवारवाद’ हावी है मेरा सीधा सा सवाल यह है कि जनता ने अध्यक्ष चुनकर भेजा है ना कि अध्यक्ष पुत्र फिर पालिका के कार्यों में उनकी दखलंदाजी क्यों? जहाँ मुख्य सदस्य ही तानाशाही चला रहे हैं और सीएमओ उन पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे।”

आज गौठान की स्थिति बद से बदतर हो चुकी है, गायों को चारा-भूसा तक नहीं मिल रहा। पिछली सरकार के समय जो व्यवस्थाएं सुचारू थीं, वे आज ठप हैं।
“हमने कुम्हारी को डंपिंग मुक्त बनाया था, लेकिन आज फिर शहर के हृदय स्थल ‘पातरा तालाब’ के पास कचरे का ढेर लगा दिया गया है। सफाई गाड़ियों की हालत खराब है, टायर और बैटरियां चोरी हो रही हैं। डीजल के खर्च का बिल 75 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख पार हो गया है, जबकि गाड़ियां सड़कों पर नजर नहीं आतीं। यह भ्रष्टाचार का स्पष्ट संकेत है।”


जनता पर टैक्स का भारी बोझ लाद दिया गया है बिना उचित सुविधा दिए जनता पर टैक्स का बोझ डालना गलत है। स्कूलों में भी फीस के नाम पर वसूली हो रही है, जबकि आत्मानंद स्कूलों की परिकल्पना मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए की गई थी।”


“सामान्य सभा की बैठकों में पत्रकारों को न बुलाना लोकतंत्र का अपमान है। पत्रकारों के मार्गदर्शन से ही विकास कार्य होते हैं, लेकिन उन्हें दूर रखा जा रहा है ताकि परिषद की कमियां बाहर न आ सकें। पार्षदों द्वारा सुझाए गए विकास कार्यों के फंड में भी भारी कटौती की गई है, जो भेदभावपूर्ण है।”
राजेश्वर सोनकर ने स्पष्ट किया कि यदि इन गड़बड़ियों पर लगाम नहीं लगी, तो कांग्रेस पार्टी जनता के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेगी।

“हमने अपने कार्यकाल में टैंकर मुक्त कुम्हारी का लक्ष्य रखा था और उसे पूरा किया था, लेकिन आज वह व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो गई है। प्रशासन के पास टैंकरों का कोई हिसाब नहीं है। गर्मी और शादी-ब्याह के इस सीजन में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं।

“नगर पालिका में जवाबदेही पूरी तरह खत्म हो चुकी है। जिस तरह मां-बाप अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए जिम्मेदार होते हैं, वैसे ही पालिका प्रशासन नगर की व्यवस्थाओं के लिए जिम्मेदार होता है। लेकिन वर्तमान सत्ता पक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय पिछले कार्यकाल पर दोष मढ़कर अपना पल्ला झाड़ रहा है। यह पूरी तरह से गलत है।”

“नगर पालिका में अवैध वसूली और दलालों का हस्तक्षेप बढ़ गया है। टैक्स जमा करने के नाम पर दलाल घूम रहे हैं। भवन अनुज्ञा जैसे कार्यों के लिए बिना बिचौलियों के काम नहीं हो रहा है। 10 हजार के काम के लिए 15 हजार रुपये मांगे जा रहे हैं। क्या इसमें अध्यक्ष की मिलीभगत है? लोटस सिटी जैसे डेवलपर्स से वसूली की बातें सामने आ रही हैं, जो बेहद गंभीर हैं।


“सब्जी मंडी के टेंडर रेट तय करने में जानबूझकर देरी की जा रही है। जब हमें पता है कि 1 अप्रैल से व्यवस्था लागू करनी है, तो तैयारी पहले क्यों नहीं की गई? पानी, सड़क और सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन के पास कोई ठोस योजना नहीं है।


“परसदा में पाइपलाइन बिछाने के बाद उसे खुला छोड़ दिया गया है, जिससे कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। छोटे बच्चे और बुजुर्ग वहां गिरकर चोटिल हो रहे हैं। काम खत्म होने के बाद गड्ढों को न भरना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। शौचालय की स्थिति भी दयनीय है और उनका रखरखाव नहीं हो पा रहा है।”
राजेश्वर सोनकर ने अंत में कटाक्ष करते हुए कहा— “एक साल भाजपा के बेहाल, अब याद है भूपेश बघेल सरकार के खुशहाल।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो वे जनता के साथ जमीनी लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरेंगे।


नगरपालिका के उपाध्यक्ष प्रमोद राजपूत ने कहा कि कुम्हारी नगर पालिका में पिछले 13 अप्रैल को सामान्य सभा की बैठक हुई, जिसमें नगर के विकास कार्यों पर चर्चा होनी थी। हम सभी कांग्रेस के साथियों ने नगर के विकास के लिए वहां काफी बातों का विरोध किया।


2024-25 का जो बजट विकास कार्यों के लिए नगर पालिका में रखा गया था, वह लगभग 153 करोड़ रुपये का था, जिसमें से हमारे नगर पालिका को मात्र 30 प्रतिशत राशि ही आवंटित की गई। अभी वर्तमान में 2025-26 का जो बजट विकास कार्यों के लिए रखा गया है, वह 146 करोड़ रुपये है। इस 146 करोड़ में से लगभग 115 करोड़ रुपये का बजट पुराने बजट की ही पुनरावृत्ति है।


नगर में पूरी सफाई व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो चुकी है। मैंने परिषद में भी यह बात कही थी कि लगभग 6-7 महीनों से नगर के किसी भी वार्ड में न तो दवाई का छिड़काव हुआ है और न ही चूने का। शहर में मच्छर इतने बढ़ चुके हैं कि आम जनता परेशान है। मैंने विपक्ष के पार्षदों से भी पूछा, उन्होंने भी सहमति जताई कि उनके वार्डों में भी छिड़काव नहीं हुआ है। आज पेयजल की समस्या से लोग परेशान हैं।

बजट में सबसे बड़ी बात ‘नया कर निर्धारण’ रखा गया था, जिसका हम सभी पार्षदों ने मिलकर विरोध किया। जब नगर में मूलभूत समस्याओं से जनता जूझ रही है, तो हम टैक्स का भार कैसे बढ़ा सकते हैं? आप पहले पानी की सुविधा दीजिए, उसके बाद अगर कोई टैक्स नहीं पटाता है तो आप नल काट सकते हैं, लेकिन बिना सुविधा दिए टैक्स बढ़ाना गलत है।


बिजली की समस्या भी वैसी ही है। अधिकारियों से बात करने पर वे कहते हैं कि लाइट उपलब्ध है। बजट में बिजली के लिए 30 लाख रुपये और सफाई व्यवस्था के लिए 40 लाख रुपये रखे गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि फोन करने पर कहा जाता है कि लाइट उपलब्ध नहीं है या पुराने लाइट रिपेयर करके लगाए जा रहे हैं। इन सभी मुद्दों का हमने और कांग्रेस के साथियों ने कड़ा विरोध किया है।


सामान्य सभा की बैठक में पत्रकारों को आमंत्रित न किए जाने पर मैंने मुख्य नगर पालिका अधिकारी और अध्यक्ष महोदय से आपत्ति जताई। यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि कुम्हारी नगर पालिका के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि सामान्य सभा की बैठक में कोई पत्रकार साथी मौजूद नहीं था। इस पर अधिकारी कोई जवाब नहीं दे पाए और पूरी सभा में सन्नाटा पसर गया।


हमने प्रेस वार्ता के माध्यम से नगर की इन ज्वलंत समस्याओं को लोगों तक पहुँचाने का निर्णय लिया है, ताकि जनता को पता चले कि उनके विपक्ष के साथी उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।”

नेताप्रतिपक्ष पार्षद जानकी ध्रुव ने कहा कि यह कुम्हारी नगर के लिए बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि 13 अप्रैल को जो बजट पेश हुआ, उसमें पत्रकार साथी मौजूद नहीं थे। मैं विगत 10 साल से पार्षद हूँ, लेकिन पहली बार देख रही हूँ कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और जनता के आईना कहे जाने वाले पत्रकारों की अनुपस्थिति में बजट पेश किया गया।


कुम्हारी नगर में आज पानी की समस्या बहुत विकराल है। इस भीषण गर्मी में 24 वार्डों की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है। वार्डों में बोर और पानी की व्यवस्था पहले से की जानी चाहिए थी, लेकिन प्रबंधन के अभाव में जनता परेशान है।

छत्तीसगढ़ी में एक कहावत है— ‘जेन मुखिया के घर के करे दूसर सियानी, ओका होथे मरे बिहानी’। नगर पालिका के मुखिया की ‘सियानी’ मार्गदर्शन कोई और कर रहा है। वर्तमान सत्ता पक्ष अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए पूर्व कार्यकाल पर दोष लगा रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पूर्व अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर के कार्यकाल में पानी की व्यवस्था बहुत अच्छी थी, टैंकर मुक्त कुम्हारी था। लेकिन आज सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप है और जगह-जगह गंदगी के अंबार लगे हैं।

पार्षद लेखराम साहू ने कहा की इतने बड़े बजट की बैठक में पत्रकार साथियों को आमंत्रित न करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। आप ही के माध्यम से जनता को पता चलता है कि बजट में क्या पास हुआ और क्या चर्चा हुई। ऐसा लगता है कि यह जानबूझकर किया गया ताकि विपक्ष के पार्षदों के मुद्दों की जानकारी जनता तक न पहुँचे।


मैंने स्वच्छता के विषय में विस्तार से बात रखी है। पहले हम 20 रुपये शुल्क देते थे, तो ई-रिक्शा और सफाई कर्मचारी घर-घर आते थे। लेकिन अब यह शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये, 100 रुपये और व्यावसायिक क्षेत्रों में 600 रुपये तक कर दिया गया है। इसके बावजूद ई-रिक्शा की व्यवस्था खराब है और पालिका की स्थिति ठीक नहीं दिख रही है।

पिछली सरकार भूपेश बघेल के समय और पूर्व अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर के कार्यकाल में सफाई कर्मचारियों को साड़ी, टोपी, दस्ताने और जूते जैसे आवश्यक सामान मिलते थे। आज कर्मचारियों के पास ये सुविधाएँ नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें बहुत परेशानी हो रही है।


पेंशन की स्थिति भी बहुत खराब है। अक्टूबर माह के आसपास से किसी भी हितग्राही को पेंशन नहीं मिली है चाहे वह वृद्धावस्था पेंशन हो, विधवा पेंशन हो, विकलांग पेंशन हो या मुख्यमंत्री पेंशन। आर्थिक सहायता वाली परिवार सहायता राशि भी रुकी हुई है। इन सभी जनहित के मुद्दों पर हमने परिषद में कड़ा विरोध दर्ज कराया है।”


“पिछली बार हमें स्वच्छता में छत्तीसगढ़ में दूसरा और देश में प्रथम स्थान मिला था। लेकिन अगर वर्तमान जैसी अव्यवस्था बनी रही, तो क्या हम फिर से प्रथम आ पाएंगे? मुझे नहीं लगता। पालिका प्रशासन इन कमियों को छिपाने की रणनीति बना रहा है, ताकि सच जनता और मीडिया तक न पहुंचे।”
“नगर पालिका की गाड़ियाँ जो स्वच्छता कार्य में लगी हैं, उन्हें पीएचई ऑफिस के पास खड़ा किया जाता है। वहां से गाड़ियों की बैटरी चोरी हो रही है। यह सीधे तौर पर लापरवाही का मामला है, जिसे हमने परिषद में भी उठाया है।”


“पालिका के भीतर कर्मचारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनमें भय पैदा किया जा रहा है। एक व्यक्ति विशेष के कारण सभी सफाई कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे और काम बंद कर दिया था। सत्ता पक्ष को समझना चाहिए कि आप चुनाव जीत चुके हैं, अब आपको निष्पक्ष होकर कर्मचारियों से तालमेल बिठाकर काम लेना चाहिए, न कि उन्हें डराना चाहिए।”


“इस भीषण गर्मी में पानी की किल्लत बढ़ गई है। पिछले साल हमने टैंकर मुक्त कुम्हारी का लक्ष्य रखा था, लेकिन आज फिर टैंकरों की जरूरत पड़ रही है। नियम बनाया गया है कि शादी या कार्यक्रम होने पर पहले रसीद कटाओ, फिर टैंकर आएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।”


“नगर में तीन मुख्य पानी टंकियां हैं। वर्तमान में इनमें से एक टंकी बंद कर दी गई है। दो टंकियों से सप्लाई होने के कारण पानी का दबाव कम हो गया है, जिससे घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। बिना किसी ठोस रणनीति के टंकी बंद करना गलत है, कम से कम गर्मी के दो महीने इसे सुचारू रूप से चलाना चाहिए था।”


लेखराम साहू ने अंत में कहा कि वर्तमान सरकार और पालिका प्रशासन फंड की व्यवस्था करने और सिस्टम को समझने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।


पूर्व पार्षद महेश सोनकर ने कहा कि आज की इस प्रेस वार्ता में मैं कुछ मूलभूत जनहितकारी योजनाओं और जनसमस्याओं के संबंध में अपनी बात रखना चाहता हूँ। जैसा कि अन्य साथियों ने भी बताया, वर्तमान भाजपा सरकार जनहित के मुद्दों से भटककर काम कर रही है। पर्याप्त साधन और संसाधन होने के बावजूद, सरकार को सकारात्मक सोच के साथ विकास की ओर कदम बढ़ाना चाहिए था। लेकिन पिछले डेढ़ सालों में ऐसा कोई कार्य नहीं दिखा, बल्कि ये लोग केवल अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारने वाले काम कर रहे हैं।


बड़े तरिया के पीछे वाली रोड के संबंध में सभी जानते हैं। रोड का निर्माण जनता की सुविधा और आवागमन के लिए किया जाता है। लेकिन बड़े ही दुख की बात है कि सरकार में बैठने के बाद जनप्रतिनिधियों ने ही उस रोड को बाधित करने का कार्य किया। जनता को विकल्प देने के बजाय, एक जनप्रतिनिधि ने जाकर वहां बैरिकेडिंग करवा दी ताकि आवागमन प्रभावित हो। मैंने पिछले 20 वर्षों से जनसेवा की है, ऐसी अव्यवस्था देखकर बहुत तकलीफ होती है।


स्टेशन चौक के पास पैचिंग के काम के बारे में बताना चाहूंगा। हमारे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 12 करोड़ 22 लाख रुपये की लागत से टू-वे रोड के निर्माण और पैचिंग कार्य की घोषणा की थी। लेकिन आज उस कार्य का कहीं अता-पता नहीं है। जो थोड़ा-बहुत काम 4 महीने पहले हुआ था, वह भी बेहद अव्यवस्थित और बेतरतीब तरीके से किया गया है।

प्रशासन का काम जनता को सुविधा देना है, न कि असुविधा। वर्तमान में जिस तरह से काम हो रहा है, उससे जनता को केवल परेशानी ही मिल रही है। यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि विकास के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।
प्रेस वार्ता के अंत मे सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पालिका प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर व्यवस्थाएं नहीं सुधरी तो वे जमीनी स्तर पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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