Kumhari-news जोरा तालाब मार्ग पर कथित कब्जे को लेकर गरमाई सियासत, नगरवासियों ने की बैठक

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कुम्हारी। जोरा तालाब मार्ग पर कथित जमीन कब्जे और रास्ते को बंद किए जाने के विवाद ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले को लेकर रविवार को किसानों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों ने बाजार चौक गांधी चौरा के पास एक बैठक बुलाई। बैठक में तीखी नोकझोंक और गर्मागर्मी देखने को मिली, जहाँ सभी ने खुलकर अपना-अपना पक्ष रखा।

नगरवासियों का आरोप है कि जोरा तालाब मार्ग पर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल का निर्माण किया जा रहा है, जिससे किसानों का खेतों में आना-जाना और आम लोगों का तालाब तक पहुँचना मुश्किल हो जाएगा। नगरवासियों का कहना है कि यह सार्वजनिक रास्ता है, जिसे बंद किया जा रहा है।

दूसरी ओर, बाउंड्री वॉल का निर्माण करवा रहे व्यक्ति का दावा है कि यह जमीन उनकी निजी है और वे अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए दीवार बनवा रहे हैं।

विवाद की एक मुख्य वजह रास्ते का अधूरा निर्माण भी सामने आया है। जोरा तालाब तक पहुँचने के लिए इसी साल सीसी रोड का निर्माण किया गया था, लेकिन यह सड़क तालाब तक पूरी नहीं पहुँचती। बीच में ही काम रोकने की वजह यह बताई जा रही है कि तालाब से ठीक पहले निजी जमीन है और सरकारी धरसा (रास्ता) सीधे तालाब तक नहीं पहुँच पा रहा है।

वहीं, ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सरकारी मार्ग तय है, तो वह तालाब के मुहाने तक क्यों नहीं पहुँच रहा है और सिर्फ आधा मार्ग ही सरकारी कैसे हो सकता है?

“स्थानीय किसान बाबला यादव ने कहा कि राकेश पाण्डेय द्वारा सड़क को घेरकर रास्ता जाम किया जा रहा है, सरकार द्वारा बनाई जा रही सड़क में बाधा उत्पन्न की जा रही है और गंदा पानी मोड़कर हमारे खेत में डाला जा रहा है। इस संबंध में हमने पालिका अध्यक्ष से अपनी बात रखी, परंतु हमें अभी तक पूर्ण आश्वासन नहीं मिला है।”

“स्थानीय किसान संतोष सोनकर ने कहा कि तालाब जाने के लिए वहाँ शुरू से ही रास्ता है, लेकिन सड़क निर्माण कार्य को भी रोक दिया गया है। अवैध रूप से दीवार खड़ा किया जा रहा है, जिससे आने-जाने वाले नागरिकों को भारी परेशानी होगी। नाली के पानी को डाइवर्ट कर दिया गया है। इसपर कार्रवाई करने के संबंध में पालिका अध्यक्ष से पूछने पर वह टाल-मटोल भरा जवाब देती हैं। हम पिछले लगभग 6 महीनों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। हमारी मुख्य माँग यह है कि इस समस्या का जल्द से जल्द समाधान किया जाए, जो दीवार अवैध रूप से खड़ी की जा रही है उसे तोड़ा जाए तथा सड़क का निर्माण कार्य पूरा तालाब तक किया जाए।”

“नगर पालिका उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने कहा कि आज बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें अध्यक्ष महोदय को भी बुलाया गया था। सभी ग्रामवासियों ने यह तय किया कि उन्हें तीन दिन के भीतर नोटिस दिया जाए, अन्यथा वे स्वयं दीवार तोड़ देंगे।
नगरपालिका का यह मुख्य अधिकार है कि वह अपने क्षेत्र में हो रहे अवैध कब्जे को तोड़े। ग्रामवासियों ने अधिकारियों से स्पष्ट कहा कि यदि तीन दिन के भीतर नोटिस नहीं दिया गया या अतिक्रमण नहीं तुड़वाया गया, तो आगामी रविवार को हम सब फिर से एकत्रित होकर सामूहिक कार्रवाई करेंगे और आवश्यकता पड़ी तो उच्च स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
अधिकारी तोड़ने का स्पष्ट आश्वासन देने के बजाय टालमटोल कर रहे हैं और केवल नोटिस की बात कह रहे हैं। मुझे लगता है कि अंततः ग्रामवासियों को ही मिलकर यह अतिक्रमण हटाना पड़ेगा।
हमारा अगला कदम यह है कि कल ही एसडीएम और कलेक्टर साहब के पास स्टे के लिए आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद जमीन की पैमाइश की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्ड में दर्ज रकबे की तुलना में नक्शे के अनुसार क्षेत्रफल कितना अधिक है और किस प्रकार कब्जा किया गया है।
तीन-चार दिन पहले हमारी एक मीटिंग हुई थी जिसमें काफी बहस भी हुई थी और अन्य किसान भी उपस्थित थे। तब उन्होंने आरआई और पटवारी से कहा कि पहले शासकीय जमीन को नापा जाए। लेकिन यह कौन सा नियम है? आपकी जमीन जितनी भी है, उसे अलग कर के नाप लीजिए।
यहाँ से लेकर तालाब तक की पूरी जमीन शासकीय भूमि है। शासकीय भूमि के नक्शे में छेड़छाड़ की गई है, और इसमें जितने भी अधिकारी-कर्मचारी संलिप्त हैं, उनके विरुद्ध आज नहीं तो कल कार्रवाई जरूर की जाएगी।”

“पूर्व पालिका अध्यक्ष राजेश्वर सोनकर ने कहा कि हमारे पुरखों और सियानों के बनाए मार्ग को अच्छा बनाने के लिए, पक्की सड़क बनाने का कार्य शुरू हुआ। सड़क जैसी बननी शुरू हुई, वैसे ही भू-माफिया और दलालों के जरिए, बाहर से आकर किसान का चोला ओढ़कर लोग बैठ गए और जनता तथा किसानों के प्रति गलत काम और अत्याचार कर रहे हैं।
आज गाँव के लोगों ने बैठक की। पहले सभी सियानों के इस बात को नहीं माना कि नाली को जेसीबी से तोड़ा जाए। जब नहीं तोड़ी गई, तो गाँव के लोगों ने खुद अपना श्रमदान देकर नाली का मार्ग बदला।
किसानों के लिए जो लड़ाई हमने लड़ी है और आगे भी लड़ेंगे।”

“इन सब विवादों के बीच राकेश पाण्डेय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि हमारी यह जमीन बहुत पुरानी खरीदी हुई है। हमने सन 2014 में इसका सीमांकन कराया था। उसी सीमांकन के आधार पर मैं अपनी बाउंड्री करवा रहा हूँ। इसी साल जनवरी-फरवरी 2026 में आरआई और पटवारी द्वारा तथा कांग्रेस के पार्षदों की मौजूदगी में वहाँ सीमांकन किया गया था और आधा रोड बनाकर आधा सीमांकन बाद में करने को कहा गया था।
वहाँ बीच में हमारा पहले से सीमेंट पोल और जाली का बाउंड्री था, जिसे तोड़ दिया गया था। इसकी जानकारी सीएमओ नेतराम चंद्राकर जी को है। बार-बार पोल तोड़ दिए जाने के कारण अब मैं पक्की बाउंड्री करवा रहा हूँ। मैं अपने नक्शे के आधार पर ही बाउंड्री करवा रहा हूँ।
यदि किसी को आपत्ति है, तो वे राजस्व अधिकारी, पटवारी, आरआई या तहसीलदार को बुलाकर इसकी जाँच करा लें।”

“नगर पालिका अध्यक्ष ने कहा कि हमारे कुम्हारी बस्ती स्थित जोरा तालाब के पास सड़क का निर्माण कार्य चल रहा है। इस सड़क निर्माण की प्रक्रिया में कुछ किसानों की निजी जमीन भी आ रही है, जिसके कारण कार्य में थोड़ी बाधा उत्पन्न हो रही है। इसी संदर्भ में, अपनी समस्याओं को लेकर किसान भाई वहाँ एकत्र हुए थे और उन्होंने मुझे भी आमंत्रित किया था, जिस पर मैं वहाँ गई थी।
मैंने किसानों को यह आश्वासन दिया है कि सभी किसान और निजी जमीन वाले लोग एक साथ बैठकर चर्चा करें और इसका उचित निष्कर्ष निकालें, ताकि उनकी समस्याओं का समाधान हो सके।
नगरपालिका अध्यक्ष होने के नाते मैं चाहती हूँ कि हम सब एक साथ बैठकर इस विषय पर विचार-विमर्श करें और आपसी सहमति से इस समस्या का निदान करें।
यदि आपसी बैठक से इस समस्या का समाधान नहीं निकलता है, तो हम राजस्व विभाग की सहायता लेंगे। हम पटवारी, आरआई, तहसीलदार, एसडीएम और आवश्यकता पड़ने पर कलेक्टर को भी आमंत्रित कर विधिवत सीमांकन करवाएंगे, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को उसकी जमीन की सही स्थिति स्पष्ट हो सके। सीमांकन करवाना राजस्व विभाग, एसडीएम और तहसीलदार का कार्य है, और वे आकर इसकी पूरी प्रक्रिया करेंगे।
इसके अलावा, नाली का गंदा पानी तालाब में जाने की जो समस्या है, वह अभी अस्थायी रूप से हो रही है और कभी-कभी स्थिति बिगड़ जाती है। इसके स्थायी निराकरण के लिए हमने प्रस्ताव भेज दिया है। जैसे ही प्रस्ताव स्वीकृत होता है, हम इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए पूरी तरह तत्पर हैं।
जनता सर्वोपरि है और जनता के हित में ही सभी उचित निर्णय लिए जाएंगे।”

इस पूरे घटनाक्रम और बैठक को लेकर सैकड़ों की संख्या में नगर के जनप्रतिनिधियों, वरिष्ठ किसानों, गणमान्य नागरिकों और आम नगरवासियों की मौजूदगी रही, जिन्होंने इस मुद्दे पर अपनी एकजुटता दिखाई और विरोध दर्ज किया।

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