भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में लीनिमा साहू का उत्कृष्ट प्रदर्शन, छत्तीसगढ़ में प्रथम स्थान

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कुम्हारी। भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रतिवर्ष गायत्री मिशन शांतिकुंज हरिद्वार (उत्तराखंड) द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय कुम्हारी की छात्रा कुमारी लीनिमा साहू पिता अशोक कुमार साहू ने छत्तीसगढ़ राज्य में 2023-24 के लिए प्रथम स्थान प्राप्त किया।

जिसे विद्यालय के प्राचार्य श्रीमती लता रघु कुमार एवं प्रभारी शिक्षक मोतीलाल साहू (व्याख्याता) ने प्रमाण पत्र एवं रुपए 3000 नगद प्रदान कर पुरस्कृत किया । विद्यालय के समस्त शिक्षक व्याख्याता ने उनकी उपलब्धि पर शुभकामनाएं दी। श्री जी पी सिंह, जीके वर्मा, अमल कुमार दुबे. आर. के. कोर्राम एवं समस्त शिक्षकों ने उज्जवल भविष्य की कामना की।

क्या है भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा ?

भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा प्रतिवर्ष अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज, हरिद्वार (उत्तराखंड) द्वारा आयोजित की जाती है। यह परीक्षा भारतीय संस्कृति के विभिन्न पहलुओं, जैसे कि इतिहास, दर्शन, कला, साहित्य, और परंपराओं के बारे में ज्ञान का आकलन करती है।

  • उद्देश्य:
    • युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति के मूल्यों और सिद्धांतों से परिचित कराना।
    • भारतीय इतिहास, दर्शन और परंपराओं के बारे में ज्ञान को बढ़ावा देना।
    • सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय गौरव की भावना को प्रोत्साहित करना।
    • स्कूली बच्चों को भारतीय संस्कृति के तथ्यों से अवगत कराना तथा उसमें निहित महान तत्वों को आत्सात कराना।
  • विषय:
    • भारतीय इतिहास और भूगोल
    • भारतीय दर्शन और धर्म
    • भारतीय कला और साहित्य
    • भारतीय परंपराएँ और रीति-रिवाज
    • भारतीय महापुरुष
  • आयोजन:
    • यह परीक्षा विभिन्न स्तरों पर आयोजित की जाती है, और इसमें छात्र, शिक्षक और आम नागरिक भाग ले सकते हैं।
  • यह राष्ट्रीय स्तर पर 11 भाषाओं में आयोजित की जाती है।
  • इस परीक्ष के लिए स्टूडेंट्स को रजिस्ट्रेशन अपने पास के गायत्री शक्ति पीठ पर जाकर करना होता है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित यह परीक्षा छात्रों को तहसील, जिला और राज्य स्तर पर विभिन्न पुरस्कारों से सम्मानित करती है।
  • महत्व:
    • यह परीक्षा छात्रों को उनकी सांस्कृतिक विरासत के बारे में जानने और समझने का अवसर प्रदान करती है।
    • यह उन्हें एक मजबूत सांस्कृतिक पहचान विकसित करने में मदद करती है।
    • यह परीक्षा छात्रों में नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देती है।
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