विस्थापन की मांग को लेकर स्टेशन चौक के व्यापारी एवं रहवासियों ने पालिका पहुंचकर जताया विरोध

हमारे WhatsApp Group से जुड़ें 👉 Join Now

रेलवे द्वारा गुरुवार को तोड़ी गई थी दुकाने और मकान

कुम्हारी। गुरुवार को कुम्हारी स्टेशन चौक में रेलवे द्वारा अवैध मकान और दुकानों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें जमीदोज कर दिया गया था जिसके विरोध में शुक्रवार को समस्त पीड़ित व्यापारी एवं परिवार के लोगों ने नगरपालिका पहुंचकर विरोध जताते हुए पालिका का घेराव कर पालिका के खिलाफ नारेबाजी की। पीड़ितों की शिकायत थी कि जिन 32 कब्जधरियों को रेलवे ने बेदखली का नोटिस जारी किया था उसके अलावा भी अन्य 10 मकानों को बिना किसी सूचना और जानकारी के तोड़ दिया गया जिससे ये 10 परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं।

बारिश के इस मौसम इन परिवारों के पास सिर छुपाने की कोई जगह भी नही है, आखिर ये परिवार कहाँ जाएंगे ? इसी बात को लेकर पीड़ित परिवार के लोगों ने सांसद विजय बघेल और विधायक भूपेश बघेल से भी मुलाकात कर अलनी पीड़ा व्यक्त की। पीड़ितों की माने तो घर पर पढ़ने लिखने वाले बच्चे भी हैं ऐसे में रेलवे प्रशासन के इस तानाशाही रवैये से सड़क पर आए इन परिवारों के समक्ष अब जहां सिर छुपाने की कोई जगह नहीं बची वहीं रोजी रोटी की समस्या भी चिन्ता का कारण बन गई है।

पीड़ित परिवारों ने पालिकाध्यक्ष श्रीमती मीना वर्मा एवं मुख्यंगरपालिका अधिकारी नेतराम चन्द्राकर के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त कर शीघ्र ही इन परिवारों के विस्थापन की गुहार लगाई है। फिलहाल इनमें से कुछ परिवारों को सामुदायिक भवन में रहने की इजाजत दी गई है साथ ही पालिका प्रशासन ने आश्वस्त किया है कि विचार विमर्श पश्चात शीघ्र ही इसका कोई हल निकाल लिया जाएगा।

गौरतलब है कि विगत कई वर्षों से इन्हें रेलवे प्रशासन द्वारा नोटिस दिया जा रहा था अंततः गुरुवार को बेदखली की कार्यवाही करते हुए इनके मकान और दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया। रेलवे प्रशासन के अपने दावे हैं कि सड़क का चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य होना है जिसके तहत यह कार्यवाही की जा रही है लेकिन बड़ी बात यह है कि बिना विस्थापन के परिवार के लोगों को घर से बेदखल करना भी न्याय संगत नहीं है तब जबकि विगत 40-50 वर्षों से ये परिवार यहां निवास कर रहा है।

यहां निवासरत नारायण यादव ने बताया कि बिना किसी सूचना के घर तोड़कर परिवार को बेघर करना कहाँ तक सही है हमे कुछ वक्त दिया जाता जिससे हम अपनी व्यवस्था कर सकते थे लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के घर तोड़ दिया गया अब अचानक हुए इस कार्यवाही से हमे बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। एक स्कूली छात्रा करीना ने अपना दर्द व्यक्त करते हुए बताया कि हम पढ़ने लिखने वाले विद्यार्थी हैं अचानक हुए इस कार्यवाही से रहने खाने की समस्या तो आ ही रही है वहीं हमारी पढ़ाई पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा इसकी जिम्मेदारी किसकी है? हमे कम से कम एक कमरे का कमरा दिया जाय जिससे हमारी पढ़ाई लिखाई में कोई बाधा न आए।

वहीं एक और पीड़ित महिला एम जयालक्ष्मी ने भी इस कार्यवाही को दुर्भाग्यजनक बताते हुए कहा कि हमारी पूरी जिंदगी यहीं गुजरी है बिना किसी सूचना और विस्थापन के हमारे घरों को तोड़ देना सरासर रेलवे प्रशासन की दादागिरी है। हमे पता है कि यह रेलवे की जमीन है हम इसे खाली करने के लिए भी तैयार हैं लेकिन हमें समय तो मिलना चाहिए था लेकिन बिना किसी सूचना के दुकानों के साथ साथ मकानों को भी तोड़कर लोगों को बेदखल करना कहाँ का न्याय है। इसलिए हम पालिका प्रशासन से यह अनुरोध करते हैं कि हमे कहीं भी कोई भी मकान आबंटित कर दिया जाय ताकि हम परिवार के साथ कहीं भटकना ना पड़े।
इन तमाम समस्याओं के मध्य पालिका प्रशासन ने पीड़ितों को आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही इसका समाधान निकालकर लोगों को व्यवस्थित किया जाएगा।

वर्सन-

“जानकारी मिली कि रेलवे प्रशासन द्वारा सड़क चौड़ीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए दुकानों को तोड़ा गया है लेकिन इसके साथ ही बिना किसी सूचना के लोगों के मकानों को तोड़ दिया गया है। हमारी संवेदना उन पीड़ित परिवारों के साथ है। शीघ्र ही सांसद महोदय, एस डी एम एवं तहसीलदार के साथ चर्चा कर कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।”

-श्रीमती मीना वर्मा
अध्यक्ष
नगरपालिका परिषद कुम्हारी

वर्सन-

“बेघर परिवारों के विस्थापन हेतु पालिका द्वारा कोई खाली एवं शहर के नजदीक शासकीय भूमि को चिन्हित किया जा रहा है। साथ ही सब्जी विक्रेता सब्जी बाजार में जो शेड रिक्त है वहां सब्जी विक्रय कर सकते हैं।”

-नेतराम चन्द्राकर
मुख्य नगरपालिका अधिकारी
कुम्हारी

error: Content is protected !!