चाटुकारिता और बिकती वफादारी

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लहजा बदलेगा उनका भी परिवर्तन के बाद चाटुकार अपना बाप बदले रहते है।

कर देंगे अनाथ अपने बाप को, ये दोगले किसी के संगे नहीं होते है।

दिनरात गुणगान गाने वाले अपने बाप के लिए जहर उगलेंगे,

दूसरे के तलवे चाटकर ये अपनी वफादारी साबित करेंगे।

जनता को धोखा देकर नए बाप को साधु–सज्जन कहेंगे,

भोली जनता हमेशा की तरह, ताली बजाने में व्यस्त रहेंगे।

भूख से तड़पती जनता नेताओं से नहीं भगवान से फरयाद करेंगे,

जिस देश में नेता नहीं, बाप चुनते हो अब उसका हाल क्या ही कहेंगे।

ऐसे रूढ़िवादी सोच इनकी, बाप के गलत होने पर भी उसे सही कहेंगे,

बस यही वजह है, अच्छी जिंदगी को तरसते थे और तरसते ही रहेंगे।

✍️ शैलेन्द्र साहू

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