ठंडक का हिसाब

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बदला है मौसम, यह पहला एहसास ठंडक का;

न जाने कितनों को खाट पकड़ाएगी।

जुबा से निकलेगी मां, और फटे जेबों से दवाइयों पर खर्च करवाएगी।

बदला है मौसम तो कुछ तो असर दिखाएगी ही,

रोकर काटो या हंसकर, ये मौसम कुछ दिनों में फिर बदल जाएगी।

✍️शैलेन्द्र साहू

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