गुहा निषाद राज जयंती – जंजगिरी में 16 को गुहा जयंती 26 को मंडई

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जंजगिरी। प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी जंजगिरी वासियों के लिए इस वर्ष का जनवरी माह बेहद खास होने वाला है। इस महीने में कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।


16 जनवरी को गुहा जयंती के अवसर पर दिन में श्री राम मानस मंडली जंजगिरी, जय गंगा मैय्या मानस मंडली नेवनारा और जय बजरंग दान पंडवानी अकलोरडीह द्वारा भजन-कीर्तन किया जाएगा।

शाम को छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक लोक संस्था मयारू भोला ओटेबंद द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा। सातोपाली गुहा निषाद समाज के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल उपस्थित रहेंगे।


26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंडई का आयोजन किया जाएगा। शाम को छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक लहर गंगा, धनेली, धमतरी द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जाएगा।


इसके अलावा, वर्तमान में श्रीमद भागवत महापुराण का आयोजन भी चल रहा है। जिसमें कथा वाचक आचार्य राजेन्द्र दास वैष्णव जी है। इस आयोजन का समापन 15 जनवरी को होगा।

गुहा निषादराज, भगवान राम के परम भक्त और निषाद जाति के राजा थे। उनकी जयंती देश भर में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों मनाई जाती है उनकी जयंती? आइए जानते हैं।

गुहा निषादराज का जीवन

गुहा निषादराज, रामायण के एक प्रमुख पात्र थे। उन्होंने भगवान राम को वनवास के दौरान गंगा नदी पार करवाई थी। उनकी भक्ति और निस्वार्थ सेवा के कारण भगवान राम ने उन्हें अपना परम मित्र माना था। गुहा निषादराज ने भगवान राम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारा और समाज सेवा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।

जयंती मनाने का महत्व

  • भक्ति और सेवा का प्रतीक: गुहा निषादराज भक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक हैं। उनकी जयंती हमें इन गुणों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
  • समाज में एकता: गुहा निषादराज ने सभी जातियों के लोगों के साथ समानता का व्यवहार किया। उनकी जयंती हमें समाज में एकता और भाईचारे का संदेश देती है।
  • सांस्कृतिक विरासत: गुहा निषादराज हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी जयंती हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ती है।

जयंती पर क्या होता है

हा निषादराज की जयंती पर देश भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें शामिल हैं

  • धार्मिक आयोजन: मंदिरों में पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और प्रवचन का आयोजन किया जाता है।
  • समाज सेवा: गरीबों को भोजन कराया जाता है, कपड़े बांटे जाते हैं और अन्य सामाजिक कार्य किए जाते हैं।
  • सांस्कृतिक कार्यक्रम: नाटक, संगीत और नृत्य जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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