बहुजनों के प्रकाश-स्तंभ हैं बाबा साहब अम्बेडकर : प्रेमलता डोंगरे
कुम्हारी। भारतीय बौद्ध महासभा शिव नगर कुम्हारी के तत्वावधान में बुद्ध विहार, वार्ड क्र. 9 में संविधान के प्रमुख शिल्पकार बोधिसत्व बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर का परिनिर्वाण दिवस मनाया गया। सुबह 9 बजे बौद्ध महासभा की अध्यक्ष उपासिका प्रेमलता डोंगरे के नेतृत्व में बौद्ध समाज ने नत नीलध्वज तले बाबा साहब अम्बेडकर के प्रति शोक, सम्मान और कृतज्ञता ज्ञापित कर पुष्पांजलि दी।
इस अवसर पर उपस्थित बौद्ध अनुयायियों ने बुद्ध विहार में सामूहिक त्रिशरण, पंचशील ग्रहण किया।
अध्यक्ष प्रेमलता डोंगरे ने अपने संबोधन में कहा कि बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर बहुजनों के हितों के लिए अपना सारा जीवन न्यौछावर कर दिया। उन्होंने संविधान में दलित-पिछड़ों को संवैधानिक व्यवस्था देकर समता का मार्ग प्रशस्त किया। वे बहुजन समाज के प्रकाश-स्तंभ हैं।
सुरेश वाहने ने कहा कि सताए हुए लोगों और शोषित-वंचितों के सम्मान और अधिकार के लिए लड़ने वाले वैचारिक योद्धा थे डॉ. अम्बेडकर। उन्होंने देश में जातिविहीन और शोषणमुक्त समाज का सपना देखा था। उन्होंने लुप्तप्राय बौद्ध दर्शन को भारत में पुनर्स्थापित किया।
उपस्थित जनसमुदाय ने बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किया। कार्यक्रम के अंत में दो मिनट का मौन रखकर बाबा साहब को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।
संध्या 5 बजे बौद्ध महासभा के उपासक-उपासिकाओं ने बुद्ध विहार से वार्ड की गलियों में कैंडल मार्च निकाला।
कार्यक्रम में विशेष रूप से किशन बोरकर, डिगांबर टेंभेकर, अनिल टेंभेकर, अन्नु शिवनकर, सावित्री बाई सहारे, वंदना पाटिल, सुनिता साखरे, वंदना गायकवाड़ सहित बौद्ध समाजी, आम्बेडकरवादी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।