कुम्हारी में 30 फीट के रावण का दहन, रामलीला का भी हुआ आयोजन

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कुम्हारी। इस वर्ष विजयादशमी के पावन पर्व पर कुम्हारी नगर में मां महामाया देवी मंदिर ट्रस्ट कमेटी द्वारा रावण दहन का भव्य आयोजन किया गया। मंदिर प्रांगण में 30 फीट ऊँचे रावण का पुतला दहन किया गया, जिसे देखने के लिए नगर के निवासियों की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर ट्रस्ट कमेटी द्वारा रामलीला का भी आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक

रावण दहन का यह आयोजन बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। भगवान राम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर सीता माता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि अंत में सत्य की ही जीत होती है।

धूमधाम से हुआ दहन, हालांकि आतिशबाजी रही फीकी

शाम ढलते ही रामलीला में भगवान राम और रावण के युद्ध का मंचन किया गया। जैसे ही भगवान राम ने तीर चलाकर रावण के पुतले की नाभि में वार किया, पुतला आतिशबाजी के साथ धू-धू कर जल उठा। इस आयोजन में बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

हालांकि, लोगों में इस बात की चर्चा भी रही कि पिछले साल की तुलना में इस बार आतिशबाजी का भव्य रूप देखने को नहीं मिला। कई लोगों को यह कहते सुना गया कि उन्हें पिछले वर्ष की आतिशबाजी की याद आ रही थी। इसके बावजूद, यह आयोजन कुम्हारी के लोगों के लिए न केवल एक धार्मिक उत्सव था, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन गया।

रावण दहन क्यों होता है?

रावण दहन की परंपरा सदियों से चली आ रही है और यह विजयादशमी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके पीछे कई धार्मिक और सांस्कृतिक कारण हैं:

भगवान राम की विजय: विजयादशमी के दिन ही भगवान राम ने दस सिर वाले राक्षस रावण का वध किया था। रावण दहन इस ऐतिहासिक घटना का स्मरण कराता है और भगवान राम की बुराई पर विजय का जश्न मनाता है।

बुराई का अंत: रावण को अहंकार, क्रोध, और बुराई का प्रतीक माना जाता है। उसके पुतले का दहन करना प्रतीकात्मक रूप से हमारे भीतर की बुराइयों जैसे अहंकार, झूठ, और क्रोध को जलाने का संदेश देता है।

सांस्कृतिक एकता: यह पर्व देश भर में लोगों को एक साथ लाता है। लोग एक साथ मिलकर इस उत्सव को मनाते हैं, जिससे सामाजिक सद्भाव और एकता बढ़ती है।

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