बरसात में बंद हो जाता है रास्ता।
रायपुर/कुम्हारी। क्षेत्र के मगरघटा–परसदा मार्ग पर आवागमन करने वाले ग्रामीणों के लिए बरसात का मौसम किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं होता। सालों पहले यहाँ स्थित पुराना ऊंचा पुल टूट गया था, जिसके बाद प्रशासन ने एक छोटा और अत्यंत कम ऊंचाई वाला पुल तो बना दिया, लेकिन यह वर्तमान जरूरतों को पूरा करने में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान पुल की ऊंचाई इतनी कम है कि बरसात के दिनों में नाले का जलस्तर थोड़ा भी बढ़ने पर पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है। ऐसी स्थिति में इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बाधित हो जाता है। मजबूरी में लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर दूसरे रास्तों से घूमकर अपने गंतव्य तक पहुँचना पड़ता है।
वर्तमान में गर्मी का मौसम है और नाला सूखा हुआ है, जो कि किसी भी पुल के निर्माण कार्य के लिए सबसे उपयुक्त समय होता है। यदि अभी प्रशासन सक्रियता दिखाए और निर्माण कार्य शुरू कराया जाए, तो आगामी मानसून से पहले ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल सकती है। एक बार मानसून शुरू होने और जलस्तर बढ़ने के बाद यहाँ किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य करना असंभव हो जाएगा, जिससे ग्रामीणों को एक बार फिर एक साल तक इस मुसीबत को झेलना होगा।
ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर उन्हें कब तक बरसात के दिनों में होने वाली इस बदहाली और लंबे चक्कर वाली परेशानी से मुक्ति मिलेगी?
इस मार्ग पर जल्द से जल्द एक ‘उच्च स्तरीय पुल’ का निर्माण कराने की जरूरत है।
