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जिंदगी मुझे हर रोज एक फरमान देती है,
उम्र मेरी हर रोज इम्तिहान लेती है।
बचपन के कलरव से यौवन के आनंद तक,
यौवन के आनंद से बुढ़ापे के अनुभव तक,
उम्र मेरी हर रोज इम्तिहान लेती है।।
नित प्रतिदिन अपनी उम्र की सीढ़ियां हूँ चढ़ती,
पहुंच कर अपने शिखर पर नीचे हूँ उतरती,
उतरते-उतरते एक दिन पूर्णतः नीचे आ जाती हूँ,
और पुनः उसी मिट्टी में मिल जाती हूँ,
जिससे मैं निर्मित हुई थी,
उम्र मेरी हर रोज इम्तिहान लेती है।
यह उम्र मुझे हर रोज नया ज्ञान देती है,
धीमी-धीमी आंच पर यह मुझे सेक लगाती है,
हर मुश्किल दौर से गुजरने का जज्बा यह सिखाती है,
यह उम्र मेरी हर रोज इम्तिहान लेती है।
✍️सविता मालवी
