छेरछेरा त्यौहार – कुंवर बाई सोनकर ने भूपेश बघेल को एक सूपा धान भेंट की

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कुम्हारी नगर में छेरछेरा पुन्नी का उत्सव

कुम्हारी। नगर में छेरछेरा पुन्नी के पावन अवसर पर, कुंवर बाई सोनकर ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश को एक सूपा धान भेंट किया। यह परंपरागत तौर पर धान और चावल का दान करने का दिन है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। कुंवर बाई का यह भावपूर्ण आशीर्वाद भूपेश के लिए एक विशेष उपहार था। बघेल ने भी ग्रामीणों को छेरछेरा पुन्नी की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश और नगर के लिए खुशहाली की कामना की।


छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध त्योहार छेरछेरा, हर साल पौष माह की पूर्णिमा को धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार न केवल नई फसल की खुशी का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और बंधुत्व का भी प्रतीक है।

क्यों मनाया जाता है छेरछेरा?

  • नई फसल का जश्न: छेरछेरा पर्व, किसानों द्वारा अपनी मेहनत का फल पाने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन किसान अपने घरों में नई फसल लाते हैं और पूरे गांव में प्रसाद बांटते हैं।
  • अन्नपूर्णा देवी की पूजा: इस पर्व के दिन अन्नपूर्णा देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि अन्नपूर्णा देवी ने ही सभी को अन्न प्रदान किया था। इसलिए इस दिन अन्न का दान करना शुभ माना जाता है।
  • सामाजिक एकता: छेरछेरा पर्व, समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाता है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और प्रसाद ग्रहण करते हैं। इससे सामाजिक बंधुत्व मजबूत होता है।
  • अहंकार का त्याग: छेरछेरा पर्व हमें अहंकार त्यागने और दूसरों के साथ बांटने की शिक्षा देता है। इस दिन लोग अपने पास से कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को दान करते हैं।

छेरछेरा पर्व कैसे मनाया जाता है?

  • पूजा-अर्चना: इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और अपने घरों के मंदिरों में अन्नपूर्णा देवी की पूजा करते हैं।
  • प्रसाद वितरण: पूजा के बाद लोग अपने घरों में बने विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाते हैं और उन्हें पूरे गांव में बांटते हैं।
  • गीत-संगीत: इस दिन लोग लोकगीत गाते हैं और ढोल-नगाड़े बजाते हैं।
  • खेल-कूद: युवा लोग विभिन्न प्रकार के खेल खेलते हैं।
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