विकास के पथ पर अग्रसर, फिर भी बुनियादी चुनौतियों से जूझता कुम्हारी

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कुम्हारी। कुम्हारी, दुर्ग जिले के अंतिम छोर पर स्थित और राजधानी रायपुर को स्पर्श करता हुआ एक 24 वार्डों वाला आकर्षक शहर है। महामाया माता के आंचल में बसा, दूर से दिखाई देने वाला कैवल्यधाम इस नगर की शोभा में चार चांद लगाता है। कुम्हारी क्षेत्र समय के साथ तरक्की कर रहा है, लेकिन यहाँ कुछ बुनियादी समस्याएं जरूर नजर आती हैं, जिसका शीघ्र समाधान करना अति आवश्यक है।

पहला समस्या जो नजर आता है, नगर की सड़कें दुरुस्त नहीं हैं। जगह-जगह गड्ढे हैं। बरसात के दिनों में कई स्थानों पर कीचड़ हो जाता है, और सूखे मौसम में नागरिक धूल से परेशान रहते हैं। स्टेशन चौक से महामाया मंदिर जाने वाले रास्ते का चौड़ीकरण करना अत्यंत आवश्यक हो गया है। शाम के समय बाजार चौक में यातायात जाम की समस्या रहती है। इस मार्ग पर स्थित दुकानदारों से चर्चा करके और सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर इस रास्ते के चौड़ीकरण का कार्य कराया जाना चाहिए।

दूसरी समस्या है, नगर में बिजली के बार-बार बंद होने की वजह से घर की माताएं-बहनें और व्यापारी वर्ग बहुत परेशान हैं। जिन लोगों का काम कंप्यूटर या मशीनरी से जुड़ा है, वे अपना कार्य सहज तरीके से नहीं कर पा रहे हैं।

तीसरा समस्या, कुम्हारी में सभी घरों में नल कनेक्शन हैं, मगर पानी बहुत कम आता है। हालाँकि, यह समस्या हर घर में नहीं है। ढलान वाले क्षेत्रों में पानी ठीक आ रहा है, लेकिन कई जगहों पर लोगों को दूर स्थित सिंटेक्स (पानी की टंकी) से पानी भरना पड़ रहा है। अमृत जल मिशन योजना के तहत पाइपलाइन बिछा दी गई है, लेकिन पानी सप्लाई का काम अभी चालू नहीं हुआ है। इस योजना को जल्द से जल्द चालू कराने की आवश्यकता है, ताकि पानी की समस्या दूर हो सके।

चौथी समस्या, नगर में अवैध शराब बिक्री और नशीले पदार्थों की बिक्री बढ़ी हुई नजर आती है। शासन-प्रशासन को इस पर कड़ाई करनी चाहिए और दोषियों को योजनाबद्ध तरीके से पकड़कर लगाम कसने की जरूरत है।

पाँचवी समस्या, कुम्हारी में चोरी के मामले बढ़े हैं। आए दिन गाड़ी चोरी की घटनाएँ सामने आती रहती हैं, और साप्ताहिक बाजार में भी चोरी के मामले होते हैं। कुम्हारी का साप्ताहिक बाजार दर्शनीय है। आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र के लोग यहाँ व्यापार और जरूरत का सामान खरीदने आते हैं। ऐसे में लोगों के सामानों की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है।

छठी समस्या, नगर से निकलने वाले कचरे के ढेर में आग लगा दी जाती है, जिससे वायु प्रदूषण होता है। कचरा जलाना बंद करके, इसका उचित निपटान करना चाहिए और रीसाइक्लिंग करने की जरूरत है, ताकि वातावरण शुद्ध हो और लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े।

मैंने कुम्हारी की जो बुनियादी और प्रत्यक्ष समस्याएं हैं, उन पर अपनी बात रखी है। इस ओर शासन-प्रशासन को ध्यान देने की आवश्यकता है।
एक पत्रकार का कर्तव्य होता है कि वह नगर की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करे। कमियां बताई जाएंगी तभी उनका समाधान हो सकेगा। एक आलोचक पत्रकार देश की तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
कबीर दास जी के दोहे से इस बात को समझा जा सकता है:


निंदक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।

और मीठा-मीठा बोलने वाले आपका भला नहीं चाहते, वे आपसे सिर्फ फायदा उठाना चाहते हैं।
चाणक्य नीति का श्लोक भी हमें सावधान करता है:


परोक्षे कार्यहन्तारं, प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।
वर्जयेत्तादृशं मित्रं, विषकुम्भं पयोमुखम्।।


सरल शब्दों में इसका अर्थ – जो मित्र पीठ पीछे आपके काम को बिगाड़ता हो, और सामने मीठा बोलता हो, ऐसे मित्र को उस घड़े के समान त्याग देना चाहिए, जिसके मुख पर तो दूध भरा हो, पर अंदर ज़हर हो। हमें चाटुकार और धोखेबाज लोगों से सावधान रहना चाहिए। एक सच्चा हितैषी वह होता है जो सामने कड़वा बोलकर भी आपका भला करता है, जबकि चापलूस व्यक्ति मीठी बातें करके पीछे से आपको नुकसान पहुँचाता है। ऐसे लोग मीठे ज़हर के समान होते हैं।

शैलेन्द्र साहू

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